वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 दिसंबर 2025 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि उनकी सरकार शिकागो, लॉस एंजिल्स और पोर्टलैंड से नेशनल गार्ड की तैनाती समाप्त कर रही है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले के ठीक बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की शिकागो में नेशनल गार्ड तैनात करने की योजना को खारिज कर दिया था।ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “हम शिकागो, लॉस एंजिल्स और पोर्टलैंड से नेशनल गार्ड हटा रहे हैं, हालांकि इन महान सैनिकों की मौजूदगी से इन शहरों में अपराध काफी कम हो गया था। संघीय सरकार की दखल न होती तो ये शहर तबाह हो जाते।” उन्होंने चेतावनी दी कि अपराध फिर बढ़ने पर सरकार “और मजबूत रूप में” वापस लौटेगी और डेमोक्रेट नेताओं को “अक्षम” करार दिया।
कानूनी झटकों की पृष्ठभूमि
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 23 दिसंबर के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन की अपील खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ने नेशनल गार्ड को घरेलू कानून प्रवर्तन के लिए तैनात करने का वैधानिक आधार नहीं दिखाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी तैनाती केवल “असाधारण परिस्थितियों” में संभव है, और इमिग्रेशन एजेंटों की सुरक्षा के लिए नियमित सैन्य बलों का उपयोग न कर पाने का प्रमाण नहीं दिया गया।इससे पहले:

  • जून 2025 में लॉस एंजिल्स में इमिग्रेशन रेड्स के विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेशनल गार्ड तैनात किया गया था।
  • अक्टूबर में शिकागो और पोर्टलैंड में भी सैकड़ों सैनिकों को संघीय नियंत्रण में लिया गया, मुख्य रूप से ICE एजेंटों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए।

हालांकि, कानूनी चुनौतियों के कारण शिकागो और पोर्टलैंड में सैनिक सड़कों पर गश्त नहीं कर सके। लॉस एंजिल्स से भी अधिकांश सैनिक पहले ही हटा लिए गए थे।

डेमोक्रेट नेताओं की प्रतिक्रिया

  • इलिनोइस गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया।
  • कैलिफोर्निया गवर्नर गेविन न्यूसम और अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने ट्रंप के “अधिकार के दुरुपयोग” पर हमला बोला।
  • ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने कहा कि तैनाती “कानून के खिलाफ” थी और अब सैनिक घर लौट सकते हैं।
  • शिकागो मेयर ब्रैंडन जॉनसन ने 2025 में शहर में हत्याओं की संख्या दशक की सबसे कम होने का हवाला देते हुए ट्रंप के अपराध दावों को खारिज किया।
क्या है विवाद का मूल?
ट्रंप प्रशासन ने तैनाती को इमिग्रेशन कानूनों के प्रवर्तन और संघीय अधिकारियों की सुरक्षा से जोड़ा, जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रंप की अन्य शहरों में सैन्य हस्तक्षेप की योजनाओं पर भी असर डालेगा, हालांकि वाशिंगटन डीसी में तैनाती अलग कानून के तहत जारी है।यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में संघीय बनाम राज्य अधिकारों के पुराने विवाद को फिर उजागर करता है, जहां ट्रंप की आक्रामक नीतियां अदालतों की दीवार से टकरा रही हैं।

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