नई दिल्ली: फरवरी का महीना करीब आते ही पूरे देश की उम्मीदें मोदी सरकार के अगले यूनियन बजट पर टिकी हुई हैं। 2026-27 का यह बजट ऐसे वक्त में पेश होने वाला है जब महंगाई का बोझ मध्यम वर्ग पर भारी पड़ रहा है और युवा पीढ़ी नए रोजगार के इंतजार में है। विशेषज्ञों की राय है कि इस बार का बजट ‘विकसित भारत’ की दिशा में मजबूत कदम उठाएगा, जिसमें समावेशी विकास के साथ-साथ आम आदमी की जेब को सीधी राहत देने पर जोर रहेगा। आइए जानते हैं उन प्रमुख क्षेत्रों को जहां बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद है।
आयकर में और राहत की आस
बजट का सबसे बड़ा आकर्षण हमेशा इनकम टैक्स रहता है। पिछले बजट में न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाई गई थी, लेकिन मध्यम वर्ग अब और छूट की उम्मीद कर रहा है। चर्चा है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक की जा सकती है। साथ ही, टैक्स-फ्री इनकम की सीमा को और ऊपर ले जाया जा सकता है, ताकि लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचे और उपभोग बढ़े।
महंगाई पर लगाम के लिए सब्सिडी जारी
खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को मजबूत फंडिंग मिल सकती है। एलपीजी सिलेंडर और उर्वरकों पर सब्सिडी को बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना है, जिससे ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
घर खरीदना आसान बनाने की दिशा में कदम
रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने और आम लोगों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के बजट में इजाफा हो सकता है। होम लोन पर ब्याज छूट (सेक्शन 24बी) की लिमिट को 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की मांग जोर पकड़ रही है। इससे पहली बार घर खरीदने वाले युवाओं को बड़ा फायदा होगा।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस
इस बजट में रोजगार सृजन को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। स्टार्टअप्स के लिए टैक्स छूट की अवधि बढ़ाई जा सकती है, जबकि ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के तहत नए मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाने की घोषणा हो सकती है। नेशनल अप्रेंटिसशिप स्कीम को ज्यादा फंडिंग देकर युवाओं को स्किल ट्रेनिंग और जॉब के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा में विस्तार
कोरोना के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ा है। आयुष्मान भारत योजना का कवरेज बढ़ाकर मध्यम वर्ग के बुजुर्गों को शामिल किया जा सकता है। शिक्षा में डिजिटल लर्निंग, नई यूनिवर्सिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित कोर्सेस को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, यह बजट राजकोषीय संतुलन बनाते हुए आम जनता की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करेगा। अगर टैक्स राहत और सब्सिडी पर सही फैसले होते हैं, तो यह ‘विकसित भारत’ के सपने को और करीब लाने वाला साबित हो सकता है। फरवरी में पेश होने वाले इस बजट पर देश की निगाहें टिकी हैं!

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