नई दिल्ली: डिजिटल युग में साइबर ठगों के हथकंडे दिन-ब-दिन चालाक होते जा रहे हैं। अगर आपके फोन पर अचानक कोई अनजान इंटरनेशनल नंबर से कॉल या मैसेज आता है, तो चौकन्ने हो जाएं! भारत में साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच, विशेषज्ञ और सरकारी एजेंसियां कुछ खास देश कोड वाले नंबरों से आने वाले संपर्कों को लेकर बार-बार चेतावनी जारी कर रही हैं। इनमें +92 (पाकिस्तान), +855 (कंबोडिया), +86 (चाइना) और +880 (बांग्लादेश) शामिल हैं।ये नंबर अक्सर VoIP (इंटरनेट बेस्ड वर्चुअल नंबर) होते हैं, जिन्हें ट्रेस करना बेहद मुश्किल होता है।
ठग इनका इस्तेमाल करके फिशिंग लिंक भेजते हैं, मैलवेयर इंस्टॉल करवाते हैं या फिर वॉट्सऐप/एसएमएस के जरिए व्यक्तिगत जानकारी चुराते हैं। एक बार फोन में वायरस घुस गया, तो रिमोट एक्सेस मिलने से बैंकिंग ऐप्स, UPI और वॉलेट तक पहुंच आसान हो जाती है – नतीजा, आपका अकाउंट मिनटों में खाली!खासकर +855 और आसपास के कोड दक्षिण-पूर्व एशिया के उन साइबर क्राइम हब्स से जुड़े हैं, जहां चाइनीज ऑपरेटर्स बड़े स्कैम चलाते हैं। +92 वाले नंबरों से अक्सर डिजिटल अरेस्ट या धमकी वाले फ्रॉड होते हैं, जबकि +86 और +880 से भी फिशिंग और मालवेयर अटैक आम हैं।क्या करें अगर ऐसा कॉल/मैसेज आए?
- तुरंत इग्नोर करें, रिसीव न करें।
- किसी लिंक पर क्लिक न करें या कोई जानकारी शेयर न करें।
- नंबर ब्लॉक कर दें।
- रिपोर्ट करें: दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) या ऐप पर ‘चक्षु’ फीचर से संदिग्ध फ्रॉड कम्युनिकेशन रिपोर्ट करें।
- अगर पैसे कट चुके हैं, तो फौरन साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं – गोल्डन आवर में रिपोर्टिंग से पैसे बच सकते हैं!
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि अनजान इंटरनेशनल नंबरों को हमेशा संदेह की नजर से देखें। अपनी डिजिटल सुरक्षा खुद संभालें, क्योंकि एक गलती महंगी पड़ सकती है!


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