नई दिल्ली : ईरान में इन दिनों सड़कों पर उबाल है। 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन में बदल चुके हैं, जो 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा चुनौती पेश कर रहा है।प्रदर्शनों की वजह और स्थितिये विरोध शुरूआत में आर्थिक संकट से भड़के — ईरानी रियाल का अभूतपूर्व पतन, महंगाई का आसमान छूना, बेरोजगारी और बुनियादी सेवाओं की कमी। तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों की हड़ताल से शुरुआत हुई, लेकिन जल्द ही ये नारे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और पूरी इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ हो गए।
अब तक की स्थिति (जनवरी 2026 के मध्य तक):
- विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के अनुसार मौतों का आंकड़ा 100 से 500+ तक पहुंच चुका है (कई रिपोर्ट्स में 116 से 544 तक के आंकड़े, जिसमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल शामिल)।
- 10,000 से ज्यादा लोग गिरफ्तार।
- देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं लंबे समय से ठप या बेहद सीमित।
- प्रदर्शन 180+ शहरों में फैल चुके हैं, जिसमें युवा, महिलाएं और छात्र प्रमुखता से शामिल हैं।
सरकार की ओर से कड़ा दमन जारी है — लाइव फायरिंग, अस्पतालों पर छापे और बड़े पैमाने पर हिरासत। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “उपद्रवी” और “विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने वाला” करार दिया है।क्या तख्तापलट की आशंका वाजिब है?कुछ विश्लेषक इसे तख्तापलट या बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ता देख रहे हैं, खासकर हाल के कुछ उदाहरणों के आधार पर:
- बांग्लादेश — शेख हसीना की सरकार युवा-नेतृत्व वाले उग्र प्रदर्शनों के बाद गिरी।
- नेपाल — 2025 का Gen Z आंदोलन सोशल मीडिया के जरिए संगठित हुआ, भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ था। परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा, अंतरिम सरकार बनी और संसद भंग कर नई चुनाव की घोषणा हुई।
- वेनेजुएला — जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने सैन्य ऑपरेशन चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया और न्यूयॉर्क ले गया। वहां उन पर ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोप हैं। कई वेनेजुएलावासियों ने इसे तानाशाही से मुक्ति के रूप में जश्न मनाया, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना भी हुई।
इन घटनाओं से ईरान के मौजूदा हालात में समानताएं दिखाई देती हैं — युवाओं की भूमिका, आर्थिक गुस्सा और विदेशी (खासकर अमेरिकी) दबाव। अमेरिका ने खामेनेई सरकार को चेतावनी दी है कि अगर दमन जारी रहा तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, अमेरिका की प्रत्यक्ष भूमिका के पुख्ता सबूत अभी नहीं मिले हैं। ईरान इसे “बाहरी साजिश” बता रहा है।खामेनेई का ताजा संदेशहाल ही में सुप्रीम लीडर ने एक वीडियो संदेश में कहा कि पिछले 40 सालों में दुश्मनों ने हर तरह से कोशिश की — सैन्य, आर्थिक, सांस्कृतिक हमले किए — लेकिन इस्लामिक रिपब्लिक मजबूत और खुशहाल है। उन्होंने दावा किया कि “वे हार गए” और ईरान पर आज भी इस्लामिक रिपब्लिक का पूरा राज है।ईरान का भविष्य अनिश्चित है। दमन से आंदोलन दब सकता है या ये और भड़क सकता है। दुनिया की नजरें टिकी हैं कि क्या ये सिर्फ एक और विरोध लहर है या 1979 के बाद सबसे बड़ा बदलाव लाने वाला क्षण? अभी जवाब किसी के पास नहीं।


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