ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो भी देश ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ के साथ कोई भी व्यापार जारी रखेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने सारे कारोबार पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ चुकाना होगा। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और ट्रंप ने इसे “फाइनल और निर्णायक आदेश” करार दिया है।ट्रंप का यह कदम ईरान में चल रहे बड़े पैमाने पर सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच आया है। पिछले कुछ हफ्तों में प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारियां हुई हैं।
ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया है और ईरान की सरकार को हिंसा रोकने की कड़ी चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस के बयानों में कहा गया है कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए हर विकल्प खुले हैं, जिसमें हवाई हमले भी शामिल हो सकते हैं।इस नए टैरिफ के मकसद में ईरान को वैश्विक व्यापार से पूरी तरह अलग-थलग करना और उसकी अर्थव्यवस्था को चरम दबाव में लाना शामिल है। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है, जहां मुद्रा का मूल्य गिर रहा है और खाद्य पदार्थों की कीमतें 70% तक बढ़ चुकी हैं।इस फैसले से दुनिया के कई बड़े देश प्रभावित होंगे, खासकर ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार जैसे:
- भारत
- चीन
- तुर्की
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
इन देशों के सामने अब बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है – एक तरफ ईरान के साथ पुराने रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते, दूसरी तरफ अमेरिका के साथ अरबों डॉलर का विशाल व्यापार। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ भी तनाव बढ़ सकता है।ट्रंप ने अभी तक इस टैरिफ के ठोस क्रियान्वयन, प्रभावित क्षेत्रों या किसी संभावित छूट के बारे में विस्तार से नहीं बताया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है और ट्रंप को अपनी घरेलू समस्याओं पर ध्यान देने की नसीहत दी है।दोनों देशों के बीच तनाव अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदलता नजर आ रहा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।


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