कोरबा : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान खरीदी प्रक्रिया में लापरवाही के कारण एक किसान ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले की गहन जांच के बाद इलाके के पटवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है, जबकि तहसीलदार और सहकारी समिति प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
हरदीबाजार तहसील के अंतर्गत ग्राम कोरबी के निवासी किसान सुमेर सिंह गोंड (लगभग 56 वर्ष) रविवार रात को इतने परेशान हो गए कि उन्होंने कीटनाशक का सेवन कर लिया। वजह थी – उनकी उपजाए गए धान (करीब 68 क्विंटल) को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के लिए जरूरी टोकन नहीं कट पाया। किसान ने पिछले एक महीने से अधिक समय तक लगातार अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन टोकन नहीं मिला।परिवार के अनुसार, निराशा और आर्थिक तंगी से मजबूर होकर सुमेर सिंह ने यह कदम उठाया। उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद अब उनकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है। उनकी पत्नी ने बताया कि धान बिक्री के लिए बार-बार प्रयास करने के बावजूद टोकन न कटने से परिवार पूरी तरह टूट गया था।
घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तुरंत जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि पटवारी कामिनी कारे ने उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद किसान के खेत का भौतिक सत्यापन नहीं किया, जिसके चलते रिकॉर्ड में धान की बजाय अन्य फसल दर्ज रही और टोकन कटने में देरी हुई। इस गंभीर लापरवाही पर कलेक्टर ने पटवारी को सस्पेंड कर दिया। साथ ही, तहसीलदार और समिति प्रबंधक को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया गया है।कलेक्टर कुणाल दुदावत ने साफ कहा कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किसानों की परेशानियों को दूर करने और समय पर MSP पर धान खरीद सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।यह घटना छत्तीसगढ़ में चल रही धान खरीदी सीजन के दौरान किसानों की बढ़ती मुश्किलों को उजागर करती है, जहां टोकन सिस्टम, सत्यापन में देरी और प्रशासनिक खामियों से कई किसान प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाई जाएगी।


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