नई दिल्ली : भारत अपनी वायुसेना को अभूतपूर्व ताकत देने के लिए तैयार है। फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर अब तक की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण रक्षा डील अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, इस मेगा समझौते की कुल कीमत 3.25 लाख करोड़ रुपये के आसपास होगी, जिसमें भारत 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदेगा—यह संख्या अब तक की किसी भी राफेल डील से कहीं ज्यादा है।
डील की मुख्य बातें एक नजर में
- कुल विमान: 114 राफेल (सबसे आधुनिक F4 और F5 वेरिएंट)
- प्रथम चरण: 90 नए राफेल F4 जेट्स + मौजूदा 36 राफेल का F4 स्तर तक अपग्रेड
- द्वितीय चरण: 24 राफेल F5 जेट्स (फ्रांस में निर्मित)
- स्वदेशी निर्माण: 18 विमान ‘फ्लाई-अवे’ कंडीशन में फ्रांस से, बाकी का निर्माण भारत में
- स्वदेशी हिस्सेदारी: लगभग 60% कंपोनेंट्स भारत में बने
- असेंबली लाइन: नागपुर में स्थापित की जाएगी
- अनुमानित हस्ताक्षर: फरवरी 2026 के मध्य में
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का भारत दौरा
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरे के दौरान दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह दौरा न केवल रक्षा समझौते, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का भी मौका होगा।मेक इन इंडिया को मिलेगा बड़ा झटकाइस डील की सबसे बड़ी खासियत मेक इन इंडिया पर इसका जोर है। भारत में राफेल के निर्माण से:
- एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में हजारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार
- भारतीय कंपनियों (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, टाटा, महिंद्रा, आदि) को बड़े ऑर्डर
- तकनीकी ट्रांसफर और आत्मनिर्भरता में तेजी
- भविष्य में अन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए आधार तैयार
वायुसेना की ताकत में ऐतिहासिक उछाल
भारतीय वायुसेना पहले से ही 36 राफेल जेट्स से पूरी तरह संतुष्ट है। नए F4 और F5 वेरिएंट में:
- उन्नत AESA रडार
- बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
- लंबी दूरी के हथियार (स्कैल्प, मेटियोर मिसाइल)
- मल्टी-रोल क्षमता (एयर सुपीरियरिटी, ग्राउंड अटैक, रेकॉन्सेंस)
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के पूरा होने के बाद भारत की हवाई रक्षा क्षमता क्षेत्रीय चुनौतियों के सामने पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। यह समझौता न केवल रक्षा खरीद का रिकॉर्ड होगा, बल्कि भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय भी खुलेगा। फरवरी 2026 में जब मैक्रों भारत आएंगे, तो दुनिया की नजरें नागपुर की असेंबली लाइन और 3.25 लाख करोड़ की इस मेगा डील पर टिकी होंगी।


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