वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला में सैन्य सफलता के बाद अब वैश्विक पटल पर नई हलचल मच गई है। निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने ट्रंप को और आक्रामक बना दिया है, और उनके ‘जनवरी 2026 प्लान’ के खुलासे ने दुनिया भर में सनसनी फैला दी। इस प्लान के केंद्र में ग्रीनलैंड है, जहां ट्रंप ने 20 दिनों की डेडलाइन देकर दावा किया है कि इसे “किसी भी कीमत पर” हासिल किया जाएगा। ग्रीनलैंड ने इस बयान को एकतरफा बताते हुए तनाव बढ़ने की चेतावनी दी है। इसके अलावा कोलंबिया, क्यूबा, मेक्सिको और ईरान जैसे देश भी ट्रंप के रडार पर हैं, जिन्हें सख्त चेतावनियां जारी की गई हैं।
ईरान पर गहराया युद्ध का खतरा
ईरान की स्थिति सबसे नाजुक दिख रही है। ‘द टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई रूस की शरण में जा सकते हैं। याद दिला दें कि जून 2025 में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। अब ट्रंप प्रशासन ने तेहरान को फिर से चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
वेनेजुएला में ‘राउंड-2’ की तैयारी
वेनेजुएला का मामला अभी थमा नहीं है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर वहां की नई सरकार (उपराष्ट्रपति के नेतृत्व में) अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करती, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सरकार ने अमेरिका से बातचीत का प्रस्ताव रखा है, लेकिन ट्रंप पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, दूसरा सैन्य ऑपरेशन जल्द शुरू हो सकता है।
क्यूबा को सीधी धमकी
ट्रंप ने क्यूबा को भी नहीं बख्शा। वेनेजुएला ऑपरेशन में क्यूबा के 32 सैनिक मारे गए थे, जो मादुरो की सुरक्षा में तैनात थे। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा की जनता अपनी सरकार से असंतुष्ट है। राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल की सरकार लंबे समय से अमेरिका-विरोधी रही है, और अब यह ट्रंप की हिटलिस्ट में शीर्ष पर है।
ट्रंप का यह प्लान वैश्विक स्थिरता को चुनौती दे रहा है। ग्रीनलैंड, कोलंबिया, मेक्सिको जैसे देशों पर भी नजरें टिकी हैं, जहां ट्रंप ने “सुधार” की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है, जबकि ट्रंप का रुख साफ है – अमेरिकी हित सर्वोपरि।

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