नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल कांग्रेस के दिग्गज नेता और बहारामपुर के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। यह बैठक ऐसे वक्त हुई है जब कांग्रेस बंगाल में अपनी जमीन खोती जा रही है और अधीर खुद पार्टी में अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। क्या यह मुलाकात BJP में उनके संभावित स्विच का संकेत है?अधीर ने इस मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ करार दिया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर हो रही हिंसा और भेदभाव के मुद्दे पर PM से हस्तक्षेप की अपील की।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इसका समय काफी संदिग्ध है—2026 के विधानसभा चुनाव से पहले TMC की मजबूत पकड़ के बीच कांग्रेस का संगठन बिखर चुका है। अधीर और CM ममता बनर्जी के बीच की कटुता जगजाहिर है, जहां दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए हैं।कांग्रेस में अधीर की स्थिति भी कमजोर पड़ी है। 2024 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया, और राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं मिली। 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीरो सीटें मिलीं, जबकि 2024 लोकसभा में सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। इससे अधीर जैसे स्थानीय चेहरों की अहमियत पर सवाल उठे हैं।
सियासी जानकारों का कहना है कि BJP, जो बंगाल में TMC को टक्कर देने के लिए मजबूत लोकल लीडर्स की तलाश में है, अधीर को अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, अधीर या BJP की ओर से इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। अगर यह सच्चाई साबित हुई, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या अधीर का अगला कदम कांग्रेस से विदाई का होगा।

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