लाहौर : पाकिस्तान की पुरुष हॉकी टीम आर्थिक संकट की वजह से एक बार फिर सुर्खियों में है। सीनियर खिलाड़ियों ने पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अर्जेंटीना में हाल ही में खेली गई FIH प्रो लीग के मैचों के लिए वादा किए गए दैनिक भत्ते का पूरा पैसा नहीं दिया गया। नाराज खिलाड़ियों ने फरवरी 2026 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले प्रो लीग के अगले चरण के मैच खेलने से इनकार कर दिया है। अगर यह विवाद नहीं सुलझा तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है।
क्या है विवाद की जड़?
खिलाड़ियों का दावा है कि अर्जेंटीना दौरे के लिए PHF ने हर खिलाड़ी को प्रतिदिन 30,000 पाकिस्तानी रुपये (लगभग 110 अमेरिकी डॉलर) भत्ता देने का वादा किया था। लेकिन पिछले हफ्ते खातों में आए पैसे सिर्फ 11,000 रुपये (करीब 40 डॉलर) ही थे। एक सीनियर खिलाड़ी ने कहा, “यह हमारे साथ शर्मनाक धोखा है। 30,000 का मतलब 110 डॉलर होता है, जबकि 11,000 सिर्फ 40 डॉलर – इतने कम पैसे में विदेश में कैसे गुजारा करें?” अर्जेंटीना में टीम ने चारों मैच हारे, और अब खिलाड़ी कह रहे हैं कि बिना पूरा भत्ता दिए वे ऑस्ट्रेलिया नहीं जाएंगे।
फेडरेशन ने ठुकराई जिम्मेदारी
PHF सचिव राणा मुजाहिद ने सफाई दी कि फेडरेशन की पॉलिसी तो 30,000 रुपये देने की है, लेकिन प्रो लीग के दोनों चरणों का पूरा खर्च पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड (PSB) उठा रहा है। PSB की पॉलिसी विदेश जाने वाले एथलीटों को सिर्फ 40 डॉलर (11,000 रुपये) प्रतिदिन देने की है। मुजाहिद ने कहा, “हमारे हाथ बंधे हैं, क्योंकि फंड PSB से आ रहा है। टिकट, होटल और भत्ता सब उन्होंने ही कवर किया।” कुछ रिपोर्ट्स में PSB ने कहा कि अगर PHF अपने फंड से ज्यादा देना चाहे तो कोई रोक नहीं है।
पाकिस्तानी हॉकी की पुरानी बीमारी
यह कोई नई समस्या नहीं है। पाकिस्तान हॉकी लंबे समय से फंड की कमी झेल रही है। हाल ही में नेशंस कप के बाद प्रो लीग में जगह मिली, लेकिन खिलाड़ियों के पुराने बकाया भी नहीं चुकाए गए। कई खिलाड़ी बेरोजगार हैं और भत्ते पर निर्भर रहते हैं। एक खिलाड़ी ने कहा, “हम क्रिकेटर नहीं हैं कि करोड़ों कमाएं। ये भत्ता हमारी जिंदगी चलाने का सहारा है।”
अब क्या होगा?
अगर विवाद नहीं सुलझा तो पाकिस्तान प्रो लीग से बाहर हो सकता है, जो उनकी हालिया वापसी के लिए बड़ा झटका होगा। फैंस और पूर्व खिलाड़ी सोशल मीडिया पर PHF और PSB की आलोचना कर रहे हैं। पाकिस्तान हॉकी को बचाने के लिए फंडिंग और पारदर्शिता की सख्त जरूरत है, वरना यह खेल और गर्त में चला जाएगा।
यह मामला पाकिस्तान खेल जगत की गहरी समस्याओं को उजागर कर रहा है – जहां खिलाड़ी मैदान पर लड़ते हैं, लेकिन ऑफ द फील्ड पैसे के लिए!

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