रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने आरोपी सौम्या चौरसिया (पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव) और उनके सह-आरोपी निखिल चंद्राकर से जुड़ी 8 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के तहत कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों में जमीन के प्लॉट और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 2.66 करोड़ रुपये है।ED के अनुसार, ये संपत्तियां आरोपीयों के रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी तरीके से खरीदी गई थीं।
ये अवैध कमाई – यानी कोयला परिवहन से जबरन वसूली (कोल लेवी) और अन्य एक्सटॉर्शन गतिविधियों से जुटाए गए पैसे – से खरीदी गई थीं। जांच में पाया गया कि 2020-2022 के दौरान कोयला ट्रांसपोर्टर्स से प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की गई, जिससे कुल 540 करोड़ रुपये की जबरन वसूली का रैकेट चला। इस पैसे का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्चों में और संपत्तियां बनाने में किया गया।
घोटाले की ताजा स्थिति:
- ED ने अब तक 273 करोड़ रुपये (पहले 237 करोड़ + नई 2.66 करोड़) की संपत्तियां अटैच की हैं।
- मामले में 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
- कुल 35 आरोपियों के खिलाफ 5 अभियोजन चालान (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं।
- जांच PMLA के तहत चल रही है, जो बेंगलुरु पुलिस, ACB रायपुर और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की FIR/चार्जशीट पर आधारित है।
ED का कहना है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस सबूतों पर की गई है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा कार्रवाइयां हो सकती हैं। यह घोटाला पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान चला था और अब ED की जांच से कई बड़े नामों पर सवाल उठ रहे हैं।छत्तीसगढ़ में कोल लेवी मामला अब एक बड़ा भ्रष्टाचार कांड बन चुका है, जहां अवैध वसूली की कमाई को बेनामी संपत्तियों में बदलने का खेल पकड़ा जा रहा है!


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