श्रीहरिकोटा : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज साल का पहला लॉन्च PSLV-C62 मिशन के साथ किया, जिसमें DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 (कोडनेम: अन्वेषा) मुख्य पेलोड था। यह भारत की ‘सुपर विजन’ वाली आंख मानी जा रही थी, जो दुश्मनों की छिपी हरकतें भी आसमान से पकड़ सकती थी। लेकिन लॉन्च के दौरान तीसरे स्टेज में गंभीर अनॉमली (रोल रेट डिस्टर्बेंस और पाथ डेविएशन) आई, जिसके कारण रॉकेट निर्धारित वेग तक नहीं पहुंच सका। ISRO ने पुष्टि की कि 16 सैटेलाइट्स (अन्वेषा सहित) सफलतापूर्वक ऑर्बिट में नहीं पहुंचे — मिशन फेल घोषित!
लॉन्च की शुरुआत और क्या हुआ?
- समय: सुबह 10:18:30 IST से सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा के फर्स्ट लॉन्च पैड से सफल लिफ्ट-ऑफ।
- पेलोड: अन्वेषा (400 किग्रा, हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग) + 15 को-पैसेंजर सैटेलाइट्स (भारतीय स्टार्टअप्स, नेपाल, स्पेन आदि से)।
- ऑर्बिट: 505 किमी सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में प्लेसमेंट का प्लान।
- समस्या: तीसरे स्टेज में “disturbance in roll rates” और पाथ डेविएशन। चौथा स्टेज शुरू नहीं हो सका → सैटेलाइट्स अलग नहीं हो पाए, संभावित रूप से वायुमंडल में जल गए।
ISRO चेयरमैन V. नारायणन ने कहा: “डेटा का विस्तृत विश्लेषण चल रहा है।” यह 2025 के PSLV-C61 फेलियर के बाद PSLV के लिए दूसरा बड़ा झटका है।अन्वेषा क्या था? क्यों इतना खास?यह DRDO का रणनीतिक “Eye in the Sky” था। हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग से लैस, जो सैकड़ों वेवलेंथ्स में डेटा कैप्चर करता है (नॉर्मल RGB कैमरों से कहीं ज्यादा सूक्ष्म)।
- हर वस्तु का अपना स्पेक्ट्रल सिग्नेचर होता है — मिट्टी, पानी, पौधे, कृत्रिम वस्तुएं सब अलग-अलग चमकते हैं।
- कैमोफ्लाज (नकली पेड़, जाल) को आसानी से पकड़ सकता था।
- सेना के लिए: इलाके का प्रकार (रेतीला, चट्टानी, चिपचिपा), सुरक्षित रूट, 3D मैपिंग — सैनिकों की सुरक्षा और रणनीति में क्रांति लाने वाला।
- सिविलियन यूज: कृषि, पर्यावरण मॉनिटरिंग, शहरी प्लानिंग।
यह मिशन भारत के लिए बड़ा झटका है, खासकर रक्षा क्षेत्र में। ISRO अब फेलियर एनालिसिस करेगा और जल्द ही अगला कदम उठाएगा। क्या PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे? समय बताएगा।


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