वाशिंगटन/काराकासवेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी ने दुनिया भर में सनसनी फैला दी है। “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” के तहत काराकास में बड़े सैन्य अभियान के दौरान मादुरो दंपति को हिरासत में लिया गया और न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोपों में मुकदमा चलेगा। अमेरिका इसे न्यायिक कार्रवाई बता रहा है, लेकिन कई देशों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। चीन ने रिहाई की मांग की, जबकि भारत ने शांतिपूर्ण हल की अपील की।यह पहला मौका नहीं है जब किसी सत्ता में बैठे या पूर्व राष्ट्राध्यक्ष के साथ ऐसी घटना हुई हो।

इतिहास में राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद या विदेशी हस्तक्षेप के चलते कई शीर्ष नेताओं का अपहरण या जबरन हिरासत हुई है:मैनुअल नोरिएगा (पनामा, 1989): पनामा के तानाशाह नोरिएगा को अमेरिकी सेना ने आक्रमण कर गिरफ्तार किया। ड्रग तस्करी के आरोप में उन्हें अमेरिका ले जाया गया और सजा हुई। यह मादुरो मामले से सबसे करीब उदाहरण है

आल्डो मोरो (इटली, 1978): पूर्व प्रधानमंत्री मोरो को रेड ब्रिगेड्स आतंकवादियों ने रोम में अगवा किया। 55 दिनों तक बंधक रखने के बाद उनकी हत्या कर दी गई। यह इटली के लिए राष्ट्रीय सदमा बना।

किम डे-जुंग (दक्षिण कोरिया, 1973): विपक्षी नेता किम को टोक्यो से कोरियाई खुफिया एजेंसी KCIA ने अगवा किया। अंतरराष्ट्रीय दबाव से रिहा हुए। बाद में वे राष्ट्रपति बने और नोबेल शांति पुरस्कार जीता।

इंग्रिड बेटनकोर्ट (कोलंबिया, 2002): राष्ट्रपति उम्मीदवार बेटनकोर्ट को FARC विद्रोहियों ने चुनाव प्रचार के दौरान अगवा किया। छह साल जंगलों में बंधक रहीं। 2008 में सेना के ऑपरेशन से छुड़ाई गईं।

पेड्रो यूजेनियो अराम्बुरु (अर्जेंटीना, 1970): पूर्व अंतरिम राष्ट्रपति को मोंटोनेरोस गुट ने अगवा कर मार डाला। यह पेरोनिस्ट बदला था।ये घटनाएं दिखाती हैं कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग भी राजनीतिक हिंसा या विदेशी कार्रवाई का शिकार हो सकते हैं। मादुरो मामले से वैश्विक तनाव बढ़ गया है, और संयुक्त राष्ट्र में इस पर बहस जारी है। विश्व समुदाय अब देख रहा है कि यह घटना क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या असर डालेगी।


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