धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिलाएं अब धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़ रही हैं। मखाना (फॉक्स नट) की खेती उनके लिए नया और लाभकारी विकल्प बनकर उभरा है। जिले के नगरी ब्लॉक के सांकरा गांव से 40 महिला किसान समूहों की टीम ने रायपुर के आरंग ब्लॉक में लिंगाडीह गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने मखाना की आधुनिक खेती, कटाई, प्रसंस्करण और मार्केटिंग का हाथों-हाथ प्रशिक्षण लिया। यह अध्ययन भ्रमण जिला उद्यानिकी विभाग ने आयोजित किया था। कलेक्टर के निर्देशन में राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, रांकाडोह और सांकरा जैसे गांवों में 90 एकड़ क्षेत्र में छोटी डबरियां और तालाब चिन्हित कर मखाना खेती शुरू हो चुकी है।

मखाना खेती क्यों है फायदेमंद?
  • जलभराव वाले तालाब-डबरियों में आसानी से उगाया जा सकता है।
  • प्रति एकड़ सिर्फ 20 किलो बीज की जरूरत, औसत उत्पादन 10 क्विंटल
  • 6 महीने की फसल, कीट-रोग कम, जोखिम न्यूनतम।
  • 1 किलो बीज से 200-250 ग्राम पॉप्ड मखाना, बाजार भाव 700-1000 रुपये/किलो
  • खुद प्रसंस्करण और पैकेजिंग करें तो मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

 

 

प्रशिक्षण में बिहार के विशेषज्ञ रोहित साहनी और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तकनीकी जानकारी दी। फार्म मैनेजर संजय नामदेव ने बताया कि सही बीज और तरीके से यह फसल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत जरिया बन सकती है।उप संचालक उद्यानिकी डॉ. पूजा कश्यप साहू ने मखाना बोर्ड और सरकारी सब्सिडी योजनाओं की डिटेल्स शेयर कीं। छत्तीसगढ़ में पहला व्यावसायिक मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी आरंग के लिंगाडीह में ही स्थापित है।धमतरी की ये महिलाएं अब मखाना को भविष्य की फसल मान रही हैं। यह न केवल कृषि विविधीकरण का शानदार उदाहरण है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे रहा है। सही सहयोग से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं!


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