रायपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांग्रेस की याचिका को मंजूर कर लिया है, जिसमें आयोजन से जुड़े खर्चों, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों की जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले की पहली सुनवाई के लिए 20 जनवरी 2026 की तारीख तय कर दी है।ये जंबूरी, जो 9 से 13 जनवरी 2026 तक बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित हुई (देश का पहला नेशनल रोवर-रेंजर जंबूरी, करीब 15,000 प्रतिभागी), शुरू से ही विवादों में घिरी रही। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टेंट, भोजन, टॉयलेट, बिजली, फोटोग्राफी आदि व्यवस्थाओं के लिए जारी टेंडर (कुल करीब 5 करोड़ रुपये) में बड़ी अनियमितताएं हुईं।

 

 

खास बात ये कि टेंडर 5 जनवरी 2026 को खुला था, लेकिन रायपुर की एक फर्म ने टेंडर खुलने से एक महीने पहले ही साइट पर काम शुरू कर दिया था – ये सवाल उठाता है कि क्या पहले से ही ठेका फिक्स था?कांग्रेस ने पहले ही ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) में शिकायत दर्ज कराई थी, प्रतिनिधिमंडल ने जांच और FIR की मांग की। अब हाईकोर्ट में याचिका मंजूर होने से पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा होगी – खासकर टेंडर की पारदर्शिता, खर्चों की वास्तविकता और जिम्मेदार अधिकारियों/मंत्रियों की भूमिका पर।

 

 

कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल ने कहा कि न्यायालय पर पूरा भरोसा है, दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने CBI जांच की मांग तक कर डाली, खासकर अस्थायी टॉयलेट (करीब 2 करोड़ खर्च) और अन्य व्यवस्थाओं पर।ये आयोजन युवाओं के लिए नेतृत्व, टीमवर्क और राष्ट्रीय एकता का प्लेटफॉर्म था, लेकिन अब ये छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है – टेंडर घोटाले से लेकर BJP आंतरिक खींचतान तक। क्या जांच से सच सामने आएगा या ये सिर्फ सियासी बयानबाजी साबित होगी? समय बताएगा।छत्तीसगढ़ के युवा स्काउट्स-गाइड्स के लिए ये घटना निराशाजनक है – उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष हो और भविष्य में ऐसे आयोजनों में पारदर्शिता बनी रहे।


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