नई दिल्ली : सोने की रिकॉर्ड तोड़ तेजी ने भारतीय परिवारों को रातोंरात और अमीर बना दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय घरों में जमा सोने की कुल वैल्यू अब 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 450 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच चुकी है—जो देश की मौजूदा GDP (लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर) से भी ज्यादा है!वैश्विक निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली की अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में अनुमान था कि जून तक भारतीय परिवारों के पास करीब 34,600 टन सोना था, जिसकी कीमत तब 3.8 ट्रिलियन डॉलर थी। लेकिन दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, जिससे यह वैल्यू तेजी से बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गई। घरेलू बाजार में भी 10 ग्राम सोना 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंच चुका है।
क्यों इतना सोना भारतीयों के पास?
- सोना भारत में सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक संपत्ति है। शादियों, त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं में इसका खास स्थान है।
- करीब 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में रखा जाता है, जो लंबी अवधि की बचत और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- कीमत बढ़ने से ‘वेल्थ इफेक्ट’ तो बनता है, लेकिन भारतीय इसे बेचकर खर्च करने की बजाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालकर रखते हैं। इसलिए रोजमर्रा की खपत पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता।
RBI भी सोने की होड़ में न केवल आम घर, बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी सोने पर बड़ा दांव लगा रहा है। 2024 से अब तक RBI ने करीब 75 टन सोना खरीदा है, जिससे कुल सरकारी गोल्ड रिजर्व बढ़कर 880 टन हो गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 14% हिस्सा है—वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव के लिए मजबूत कदम!यह आंकड़े बताते हैं कि भारत न केवल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है, बल्कि निजी स्तर पर सबसे बड़ा भंडार रखने वाला देश भी। सोना यहां सिर्फ चमक नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। अगर आप भी सोने में निवेश कर रहे हैं, तो यह सही समय है—लेकिन याद रखें, यह लंबी दौड़ का खेल है!


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