जबलपुर। मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक शहर जबलपुर में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का भव्य उद्घाटन हो गया है। मानस भवन में आयोजित इस तीन दिवसीय (2 से 4 जनवरी 2026) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज के साथ 12 देशों से आए विद्वान और शोधकर्ता शामिल हुए हैं। यह आयोजन रामायण के गहन पहलुओं, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर वैश्विक दृष्टिकोण से चर्चा का मंच बन रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। उन्होंने भगवान राम के जीवन को त्याग, समर्पण और समावेश का प्रतीक बताते हुए कहा कि राम और कृष्ण के चरित्र से जीवन के हर सवाल का जवाब मिलता है। संत परंपरा को भारत की आत्मा करार देते हुए उन्होंने जबलपुर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर बताया।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संतों ने सनातन संस्कृति को जीवंत रखने में अहम भूमिका निभाई है। रामचरितमानस ने भारत को एकजुट रखने में ऐतिहासिक योगदान दिया है। वैचारिक प्रदूषण के इस
युग में रामायण पर आधारित ऐसे सम्मेलन जरूरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस को जबलपुर के अलावा देश के अन्य शहरों में भी आयोजित किया जाए, ताकि रामकथा को जीवन में उतारा जा सके।इस सम्मेलन के जरिए रामायण के वैश्विक प्रभाव को नई रोशनी में प्रस्तुत करने का प्रयास हो रहा है। विदेशी शोधकर्ताओं की भागीदारी से भारतीय संस्कृति की universal अपील एक बार फिर साबित हो रही है। रामराज्य की अवधारणा आज भी समाज को दिशा देने वाली है – यह संदेश इस कॉन्फ्रेंस से पूरी दुनिया तक पहुंचेगा!

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