नई दिल्ली : 2017 के चर्चित उन्नाव रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें सेंगर की सजा निलंबित कर उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। अब सेंगर जेल में ही रहेंगे।हालांकि, एक अलग मामले (पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत) में भी सजा काट रहे सेंगर की रिहाई फिलहाल नहीं हो पाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सीबीआई की दलीलों को सुनते हुए कहा कि मामले में गंभीर कानूनी सवाल उठते हैं और हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश का असर तत्काल रोका जाना जरूरी है।इस फैसले के ठीक बाद कुलदीप सेंगर की बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक ओपन लेटर शेयर किया, जिसमें परिवार के 8 साल के संघर्ष, लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया। इशिता ने लिखा कि वह थक चुकी हैं, डरी हुई हैं और धीरे-धीरे उम्मीद खो रही हैं, लेकिन फिर भी न्याय की आस नहीं छोड़ी है।
उन्होंने पत्र में कहा, “लोग हमें ‘ताकतवर’ कहते हैं, लेकिन यह कैसी ताकत है जो एक परिवार को इतने सालों तक चुप करा देती है? मेरी पहचान सिर्फ ‘एक भाजपा विधायक की बेटी’ तक सिमट गई है। सोशल मीडिया पर मुझे बार-बार रेप और मौत की धमकियां मिलती हैं, जो अब रोज की आदत बन गई हैं।”इशिता ने परिवार की बदतर होती मानसिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हमारी इज्जत को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया है। आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से हम पूरी तरह थक चुके हैं। हम न धमकी दे रहे हैं, न सहानुभूति चाहते हैं—बस न्याय मांग रहे हैं, क्योंकि हम भी इंसान हैं।”
यह मामला 2017 का है, जब एक नाबालिग लड़की ने सेंगर पर नौकरी का लालच देकर रेप का आरोप लगाया था। 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में सजा निलंबित करते हुए कहा था कि सेंगर विधायक होने के बावजूद ‘पब्लिक सर्वेंट’ की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए POCSO एक्ट की कुछ धाराएं लागू नहीं होतीं। सीबीआई ने इसी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।मामला अब आगे की सुनवाई के लिए जनवरी 2026 में सूचीबद्ध है। इस बीच न्याय की लड़ाई दोनों पक्षों से जारी है।


Leave a Reply