नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन की वेनेजुएला पर सख्ती जारी है। अमेरिकी सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर मैरिनेरा (पहले नाम बेला-1) को जब्त कर लिया। यह कार्रवाई दो हफ्तों की पीछा करने के बाद की गई, जिसमें अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना शामिल थी। टैंकर पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है, क्योंकि यह ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था जो वेनेजुएला के अवैध तेल व्यापार में लगा था।रिपोर्ट्स के अनुसार, टैंकर दिसंबर 2025 में कैरिबियन सागर में अमेरिकी ब्लॉकेड से बचकर भागा था। बचने की कोशिश में चालक दल ने जहाज पर रूसी झंडा पेंट किया और नाम बदल लिया।
रूस ने इसे अस्थायी रूप से अपने रजिस्ट्री में शामिल किया, लेकिन अमेरिका ने इसे ‘स्टेटलेस’ (बिना वैध झंडे वाला) मानकर कार्रवाई की। जब्ती के समय रूसी नौसेना के जहाज और पनडुब्बी पास थे, लेकिन प्रत्यक्ष टकराव टल गया।उसी दिन अमेरिकी सेना ने कैरिबियन में एक दूसरा टैंकर सोफिया भी पकड़ा। दोनों जहाज वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल ले जा रहे थे। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने इसे ‘शैडो फ्लीट’ के खिलाफ बड़ी सफलता बताया।रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
रूसी परिवहन मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन करार दिया और कहा कि उच्च समुद्र में किसी देश को दूसरे देश के वैध जहाज पर बल प्रयोग का अधिकार नहीं है। मॉस्को ने जहाज पर सवार रूसी नागरिकों की सुरक्षा की मांग की है। कुछ रूसी अधिकारियों ने इसे ‘समुद्री डकैती’ बताया।यह घटना ट्रंप की वेनेजुएला नीति का हिस्सा है, जहां अमेरिका ने हाल में निकोलस मादुरो को हटाने के बाद देश के तेल पर नियंत्रण की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रूस-अमेरिका तनाव बढ़ सकता है, खासकर जब रूस वेनेजुएला का पुराना सहयोगी है।ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाइयां प्रतिबंधों को लागू करने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी हैं।

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